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प्रभु श्रीनाथजी का आषाढ़ शुक्ल नवमी का श्रृंगार

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व्रज – आषाढ़ शुक्ल नवमी
Saturday, 21 July 2019
मुझे ज्ञात जानकारी के अनुसार आज श्रीजी को केसरी मलमल के धोती-पटका और श्रीमस्तक पर दुमाला पर सेहरा धराया जायेगा.
पिछवाई सेहरा के भाव के चित्रांकन की आएगी.
राजभोग दर्शन –
कीर्तन – (राग : मल्हार)
नयों नेह नयों मेंह……………
साज – श्रीजी में आज श्री गिरिराजजी के निकुंज में विवाह खेल की निकुंज-लीला, सेहरे के श्रृंगार में दर्शन देते श्री स्वामिनी जी एवं श्री यमुना जी के सुन्दर चित्रांकन से सुसज्जित पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया और चरणचौकी के ऊपर सफेद बिछावट की जाती है.
वस्त्र – श्रीजी को आज केसरी रंग की मलमल पर रुपहली ज़री की किनारी से सुशोभित धोती एवं राजशाही पटका धराये जाते हैं.
श्रृंगार – प्रभु को आज मध्य (घुटने तक) का उष्णकालीन हल्का श्रृंगार धराया जाता है. आभरण मोती के धराये जाते हैं. श्रीमस्तक पर केसरी रंग के दुमाला के ऊपर लालफोंदना वाला मोती का सेहरा, बायीं ओर शीशफूल एवं दायीं ओर मोती की चोटी धरायी जाती है. श्रीकर्ण में मकराकृति कुंडल धराये जाते हैं. तुलसी एवं श्वेत पुष्पों वाली दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती है. श्रीहस्त में दो कमल की कमलछड़ी, झिने लहरिया के वेणुजी एवं दो वेत्रजी धराये जाते हैं.
पट गोटी राग रंग की आती हैं.
—राजेन्द्र रेही के ह्वाट्स एप मेसेज से साभार
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